राधा कृष्ण मन्दिर, सैनिक चौक,भुंतर में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय भगवान शिव कथा के तृतीय दिवस की कथा में श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या कथा व्यास साध्वी श्वेता भारती ने पार्वती जन्म प्रसंग सुनाया।
कथा आयोजन में माता पार्वती जन्मोत्सव को बड़े धूमधाम के साथ मनाया गया। सुमधुर भजन का गायन किया गया, जिससे भक्त मंत्रमुग्ध हो गए।
दिव्य गुरु सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री श्वेता भारती जी ने बताया कि महाराज हिमवान व महारानी मैना के आह्वान पर जगदंबा की आराधना कर उन्हें पुत्री स्वरूप में पाने का वरदान मांगा। माता सती जो पूर्व जन्म में देह त्याग कर चुकी थीं, शिव से यह प्रार्थना करती हैं कि वे अगले जन्म में आपकी ही सेविका बनकर जन्म लें। उसी प्रार्थना से फलस्वरूप माता सती पार्वती के रूप में महाराज हिमवान के घर कन्या के रूप में जन्म लेती हैं।
हिमाचल ने पुत्री के जन्म की खुशी में असंख्य गायों का दान किया। हमारी भारतीय संस्कृति में प्रत्येक शुभ अवसर पर गोदान की परंपरा रही है। गोदान से बढ़कर और कोई भी उत्तम दान नहीं कहा जाता है, क्योंकि जो प्राकृतिक नस्ल की देसी गाय है वह गोवंश द्वारा का सबसे अमूल्य धन है।
इतिहास प्राचीन समय में विवाह शादियों में दहेज में गाय देने की प्रथा थी। यज्ञ के अंदर यजमान यज्ञकर्ता को गाय दान दिया करता था। विद्यार्थी गुरु को दक्षिणा स्वरूप में गाय दिया करते थे। प्राकृतिक तरीके से गाय भारत देश की आर्थिक समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण, कृषि में अन्न उत्पादन, मानव के स्वास्थ्य क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
इतिहास रचत् अमरदेव जी कहते हैं कि गाय अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों को प्रदान करने वाली कामधेनु के समान है।
दिव्य जयोति जाग्रति संस्थान की ओर से गौ सेवा में पहल के तहत देसी गाय के संवर्धन व संरक्षण के कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत अनेक गौशालाओं में जाकर प्राकृतिक नस्ल की देसी गायों का संवर्धन एवं संरक्षण किया जाता है।
कथा का समापन गुरु की पावन आरती से किया गया ।
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भुंतर में शिव कथा का तृतीय दिवस: पार्वती जन्मोत्सव पर गूंजे भजन, भक्त हुए मंत्रमुग्ध