दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा श्री राधा कृष्ण मन्दिर,सैनिक चौक, भुंतर में आयोजित भगवान शिव कथा के प्रथम दिवस दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या कथा व्यास साध्वी सुश्री श्वेता भारती जी ने कथा का रसपान करवाते हुए कहा की भगवान शिव का नाम उनकी वेशभूषा और उनका आचरण हमे समाज के किसी ना किसी पक्ष से संबंधित ज्ञान प्रदान करता है।
भगवान शिव ने समुद्र मंथन के समय घोर हलाहल विष का पान करने की लीला यह संदेश देती है की हमारे अंतःकरण में ज्ञान की मथनी के माध्यम से मंथन कर विषय विकारो को बाहर कर परमात्मा के अमृत को प्राप्त करना है। आज प्रत्येक मनुष्य अपने विकारो की अग्नि में जलकर अशांत है।
शांति की प्राप्ति हेतु प्रत्येक मानव को घट में अमृत को प्राप्त करना होगा। हमारे शास्त्र ग्रंथों के अनुसार मानव शरीर पाँच तत्वों से निर्मित है और मस्तक रूपी भाग आकाश तत्व से निर्मित है जिसे गगन मंडल कहा जाता है,गगन मंडल अमृत का कुआ तहां ब्रह्म का वासा, जिस प्रकार से हम भगवान शिव के मस्तक पर गंगा जी को सुशोभित देखते है गंगा जी के जल को अमृत कहकर संबोधित किया जाता है।
यह हमारे मस्तक रूपी गगन मंडल में जो अमृत का कुंड है उसे प्राप्त करने का संदेश देती हैं।यदि हम उस अमृत की धार को प्राप्त करना चाहते है हो हमे एक गुरु की कृपा से अंतर के जगत में उतरकर अमृत पान की युक्ति को जानना होगा।
जानकारी देते हुए साध्वी गुरुगीता भारती जी ने बताया कि कथा में प्रतिदिन श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का प्रबन्ध भी किया गया है।
कथा के दौरान मधुर भजनों का गायन किया गया और प्रभु की पावन मंगलमय आरती के साथ कथा का समापन हुआ।
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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा पाँच दिवसीय भगवान शिव कथा अमृत का भव्य शुभारंभ