श्री राधा कृष्ण मन्दिर, सैनिक चौक,भुंतर में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय भगवान शिव कथा के द्वितीय दिवस की कथा में श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या कथा व्यास साध्वी श्वेता भारती ने सती दहन प्रसंग सुनाया।साध्वी ने बताया कि प्रजापति दक्ष अहंकार का प्रतीक है, जिसके अहंकार के कारण व्यक्ति प्रभु को जान नहीं पाता।भगवान शिव द्वारा प्रजापति दक्ष का शिरोछेदन करना वास्तव में जीवात्मा को अहंकार का मर्दन कराना है।
सतीमाता ने देह त्याग करने पर भोलेनाथ क्रोध स्वरूप में तांडव कर विनाश करने लगे।दक्ष के मानिद मानव अहंकार में हम प्रकृति रूपी माता सती का अपमान करते हैं अर्थात प्रकृति का शोषण करते हैं।तब भगवान शिव कुपित होकर मानव को दंड देते हैं।आज पर्यावरण संकट, ग्लोबल वार्मिंग, तापमान का बढ़ना, जलस्तर का कम हो जाना इत्यादि यदि देखें तो वास्तव में ईश्वर के द्वारा मानव को दिया गया दंड ही है।
आज मानव अपनी भोग प्रवृत्ति के कारण यह सोचता है कि यह समस्त संसार एक बाजार है, लेकिन हमारी आध्यात्मिक संस्कृति हमें यह ज्ञान कराती है कि यह पूरा संसार एक परिवार है।ईश्वर ने जिस मानव को रहने के लिए यह पृथ्वी रूपी घर दिया है, वास्तव में मानव का यह कर्तव्य बनता है कि वह अपने घर को स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए अपना सहयोग प्रदान करे।
यदि हम जनहित एवं पर्यावरण को बचाना चाहते हैं, तो हमें सादगी से जीवन जीकर अच्छीआदतों को अपनाना होगा। संस्थान द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए "संरक्षण" नाम से प्रकल्प चलाया जा रहा है। संस्थान इस प्रकल्प के माध्यम से नुक्कड़ नाटक,रैली और व्याख्यान कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यावरण संकट से उभरने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है।
कथा में श्री हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में सन्त समाज द्वारा श्री हनुमान जी के भजनों का गायन हुआ,जिनपर सभी प्रभुप्रेमी झूम कर नाच उठे। कथा व्यास जी ने अपने विचारों में कहा कि श्री हनुमान जी का जीवन प्रत्येक भगत के लिए प्रेरणा है।भगति मार्ग पर आने वाली बाधाओं एवं प्रलोभनो से किस प्रकार बच कर अपनी मंजिल को पाया जाता है ये हमें श्री हनुमान जी के चरित्र से सीखने को मिलता है।
कथा का समापन पावन आरती के साथ हुआ ।
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भुंतर में शिव कथा का दूसरा दिन: सती दहन प्रसंग से अहंकार त्याग और पर्यावरण संरक्षण का संदेश, हनुमान जयंती पर गूंजे भजन