• Wednesday, 27 May 2026
देवधुनों से गूंजा बाली चौकी, दर्जनों देवी-देवताओं के महासंगम ने मोहा जनमानस

27 May 2026 | 30 Views

देवधुनों से गूंजा बाली चौकी, दर्जनों देवी-देवताओं के महासंगम ने मोहा जनमानस

राज्य स्तरीय बाली चौकी मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब, देव संस्कृति की दिखी अनोखी झलक

मंडी जिला के सराज विधानसभा क्षेत्र मुख्यालय बाली चौकी में आयोजित राज्य स्तरीय मेले में इस बार देवी-देवताओं का भव्य महासंगम देखने को मिला। देवभूमि सराज की पावन धरा पर लगभग दर्जनों देवी-देवताओं की उपस्थिति में मेला श्रद्धा, आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम बन गया।

मेले का मुख्य आकर्षण आराध्य देव श्री चूंजवाला महादेव, शिव भक्त आराध्य देव श्री अटल मार्कण्डेय महर्षि, आदि शक्ति मां अंबिका, देवता भूणी, देवता छांजनू घटोत्कच, देवता पटरुन्नू, देवता खोड़ू महाराज और देवता जहल की भव्य जलेब रही। जैसे ही देवी-देवताओं के रथ बाली चौकी बाजार से गुजरे, पूरा क्षेत्र देव धुनों और जयकारों से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्पगुच्छ अर्पित कर देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त किया।

कुल्लवी परिधानों में सजे देयुल्लू और देवगणों ने ढोल-नगाड़ों, करनाल, नरसिंगे और शहनाई की मधुर धुनों से मेले का वातावरण भक्तिमय बना दिया।

हालांकि इस बार पंचायत चुनावों के चलते मेले के आयोजन को लेकर व्यापारी वर्ग में असमंजस की स्थिति बनी रही, लेकिन पूर्व चेयरमैन दलीप सिंह ठाकुर, व्यापार मंडल और देवी-देवताओं के कारकूनों के सहयोग से मेला पूरे उत्साह के साथ संपन्न हुआ।

पूर्व चेयरमैन दलीप सिंह ठाकुर ने कहा कि यह मेला देवनीति और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सराज की पहचान उसकी देव संस्कृति है और देवी-देवताओं का एक साथ एकत्र होना क्षेत्र के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं के आशीर्वाद से ही देवभूमि सराज में सुख-समृद्धि बनी रहती है तथा ऐसे मेले हमारी संस्कृति, सभ्यता, एकता और भाईचारे के प्रतीक हैं।

व्यापार मंडल अध्यक्ष यशपाल शर्मा ने बताया कि मेले में आए दुकानदारों और बाहरी व्यापारियों के लिए सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं। वहीं वरिष्ठ नेता जोगिंदर शर्मा ने कहा कि सराज में मान्यता है कि वर्ष में एक बार देवी-देवता अपने हारियानों को दर्शन देने और क्षेत्र की खुशहाली के लिए एक स्थान पर एकत्र होते हैं। उन्होंने बताया कि देवता छांजनू को महाभारत कालीन घटोत्कच का रूप माना जाता है और सराज में उनकी विशेष मान्यता है।

मेला कमेटी सदस्यों ने बताया कि पंचायत चुनावों के कारण इस बार पांच दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेलकूद प्रतियोगिताएं, कुल्लवी नाटी, लोकगीत और देव गाथाओं की प्रस्तुतियां आयोजित नहीं हो पाईं, जिससे स्थानीय कलाकारों में निराशा देखने को मिली।

एसडीएम विचित्र सिंह ने कहा कि प्रशासन का प्रयास रहता है कि क्षेत्र की देव परंपराएं जीवित रहें। उन्होंने मेला कमेटी, पुलिस विभाग, जल शक्ति विभाग, बिजली विभाग और अन्य सभी विभागों के सहयोग से मेले के सफल आयोजन पर सभी का आभार व्यक्त किया।

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Published on: 27 May 2026

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