भुंतर निवासी विनोद शर्मा ने हिमाचल प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को दी जा रही सब्सिडी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
अपने पत्र में विनोद शर्मा ने कहा है कि वर्तमान में बिजली मीटर के आधार पर दी जा रही सब्सिडी का लाभ मुख्य रूप से मकान मालिकों को मिल रहा है, जबकि किरायेदार इस सुविधा से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अधिकांश किरायेदारों के नाम पर बिजली मीटर नहीं होता, जिसके कारण वे सरकारी सब्सिडी का लाभ प्राप्त नहीं कर पाते।
शर्मा ने कहा कि किरायेदार पहले ही बढ़ते किराए, महंगाई और अन्य घरेलू खर्चों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में बिजली सब्सिडी से बाहर रखे जाने से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। उन्होंने इसे समानता के सिद्धांत के विपरीत बताते हुए आम जनता के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करार दिया।
पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि प्रदेश सरकार ने चुनावों के दौरान 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। ऐसे में किरायेदारों को इस लाभ से वंचित रखना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
विनोद शर्मा ने मुख्य न्यायाधीश से मामले का संज्ञान लेने, सरकार की मौजूदा नीति की समीक्षा करवाने तथा किरायेदारों को भी बिजली सब्सिडी का लाभ सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे प्रदेश के हजारों गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत मिल सकती है।
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किरायेदारों को बिजली सब्सिडी से बाहर रखना भेदभावपूर्ण, हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग